अपने हुए पराये अपने क्यों हैं खफा ?

अटल-आडवाणी युग से इतर मोदी-शाह युग की भाजपा वो भाजपा नहीं है जो निर्धारित खांचों में ही अपने को समेटे रखे। उसके सामने बड़ा लक्ष्य है दक्षिणी किले को भेदना और पश्चिम बंगाल व केरल की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ उन राज्यों में जमीन मजबूत करना जहां गुंजाइश है। अध्यक्ष अमित शाह देश भर में प्रवास करने के साथ-साथ ये भी देख रहे हैं कि किसका साथ लेने से पार्टी को फायदा होगा। ऐसे में यदि शिवसेना सरीखा कोई पुराना सहयोगी पीछे छूटता है तो वो इसकी परवाह नहीं करेंगे।