भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा?

भाजपा में अंदर से ही सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं। पहले पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने केंद्र सरकार को आर्थिक मोर्चों पर विफल बताया तो फिर एक और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने सरकार को आर्थिक मुद्दों पर कटघरे में खड़ा कर दिया। शौरी ने तो नोटबंदी पर सरकार की मंशा पर ही सवालिया निशान लगा दिया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी एक बड़ी मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम थी। इसके तहत बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद किया गया। इसका प्रमाण खुद आरबीआई ने यह कहकर दिया कि नोटबंदी के दौरान 99 फीसदी पुराने नोट बैंकों में जमा किए गए। इससे भ्रष्टाचार में कमी होने के दावे किए जा रहे थे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। असंगठित क्षेत्र पर नोटबंदी का असर पड़ा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वस्तुओं की मांग घटी। इससे कंस्ट्रक्शन, टेक्सटाइल सेक्टर पर भी बुरा असर पड़ा