क्रिकेट का टेलीविजनकरण

ये वर्ष 1993 से पहले की बात है। भारत में क्रिकेट मैचों का प्रसारण केवल दूरदर्शन पर होता था। हर मैच के टेलीकास्ट के लिए दूरदर्शन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से पांच लाख रुपए वसूलता था। ये स्थिति 1993 में तब बदल गई जबकि बीसीसीआई ने भारत-इंग्लैंड सीरीज के अधिकार ट्रांस वल्र्ड इंटरनेशनल (टीडब्ल्यूआई) को बेच दिए। तब दूरदर्शन को भारत में इन मैचों को दिखाने के लिए टीडब्ल्यूआई को एक मिलियन डॉलर (करीब 5.5 करोड़ रुपए) देकर अधिकार हासिल करने पड़े। ये अपने आपमें ऐसा अनुबंध था, जिसने न केवल बीसीसीआई की आंखें खोल दीं कि किसी सोने की मुर्गी पर वो बैठा है बल्कि भविष्य के लिए खजाने का दरवाजा भी मिल गया। तब तक अमेरिका और यूरोप में तो खेलों की प्रसारण अधिकार हासिल करने के लिए टीवी कंपनियां मोटी रकम खर्च करती थीं लेकिन वो स्थिति भारत में नहीं थी क्योंकि यहां टी.वी. चैनल के नाम पर केवल दूरदर्शन था। इस सौदे से तब बीसीसीआई को छह लाख डॉलर (करीब तीन करोड़) का फायदा हुआ था। यही वो बदलाव का समय था, जहां बीसीसीआई बदलने लगा। प्राइवेट चैनलों के आने के बाद तो क्रिकेट बोर्ड की पांचों अंगुलियां घी में थीं और सिर कढाई में। सफर कहां से कहां पहुंच गया।