खेलेगो बनोगे नवाब

एक जमाना था जब घरों में कहा जाता था कि खेलेगो कूदोगे बनोगे खराब..पढोगे लिखोगे बनोगे नवाब। सत्तर के दशक तक आम भारतीय परिवारों में बच्चों के ज्यादा खेलने कूदने को बहुत खराब निगाह से देखा जाता था बल्कि माना जाता था कि ऐसा करने वाले बच्चे अपना वर्तमान और भविष्य दोनों बिगाड़ लेते हैं। वो जीवन में कुछ नहीं कर पाते। ये भी बात सही था कि तब तक खेलों में न तो बहुत पैसा था और न ही बहुत बेहतर करियर। हालांकि अब ये कहावत 360 डिग्री बदल चुकी है। अब धड़ल्ले से कहा जाने लगा है कि खेलेगो कूदोगे बनोगे नवाब।

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