हरियाणा में फेल, दिल्ली में पास

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को एक बार फिर अभयदान मिल गया है। उनके तीन साल के कार्यकाल में हिंसा की तीन बड़ी वारदातें हो चुकी हैं, जिनमें सत्तर से ज्यादा लोगों को अपने बहुमूल्य जीवन से हाथ धोना पड़ा है। 2014 में कथित संत रामपाल को उनके डेरे से बाहर निकालने के लिए खट्टर सरकार को 18 दिन तक पसीना बहाना पड़ा था। फरवरी 2016 में आरक्षण के लिए चल रहा जाट आंदोलन हिंसक हो उठा, जिसमें बड़े पैमाने पर आगजनी हुई तब फायरिंग में तीस लोग मारे गए और अब राम रहीम को सजा सुनाए जाने के बाद भड़की हिंसा में 38 लोगों की जान चली गई। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व का भरोसा खट्टर में बना हुआ है क्योंकि उसे लगता है कि मुख्यमंत्री ने हर बार संयम से काम लिया है।