दिल्ली गैंगरेप की घटना से पर्यटकों में आई कमी

प्रदीप सिंह

दुनियाभर के पर्यटकों को भारत की आबो-हवा, प्राचीन कला संस्कृति, मंदिर, ऐतिहासिक किले खूब आकर्षित करते हैं। केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी पर्यटकों को अपनी तरफ खींचने की कोशिश में जुटी हैं, पर दिल्ली गैंगरेप की घटना से अचानक विदेशी पर्यटकों की संख्या घटी है।

विश्व-ग्राम के इस दौर में पर्यटन को बढ़ावा देना केंद्र व राज्य सरकारों के प्राथमिक लक्ष्यों में है। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कई कोशिशें हो रही हैं। पर देश की राजधानी में हुए गैंगरेप की घटना से इस दिशा में बाधा उत्पन्न हुई है। राजधानी के साथ-साथ विभिन्न राज्यों से ऐसी खबरों के आने से विदेशी पर्यटकों की संख्या में अचानक कमी आई है। इसका सबसे बड़ा कारण स्वयं को असुरक्षित महसूस करने का है।

पर्यटकों के आने में जो कमी आई है और इससे जुड़े जो आंकड़े हैं, उससे विदेश मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय के माथे पर पसीना आ गया है। एक तरफ विदेश मंत्रालय दूसरे देशों में भारत की बन रही नकारात्मक छवि को लेकर चिंतित है। दूसरी ओर गृह मंत्रालय इसे सुरक्षा और कानून व्यवस्था के प्रश्न से जोड़कर देख रहा है।

पर्यटकों की कमी के संकेत पर सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर हो गई है। इसके लिए पर्यटन मंत्रालय ने बहु-भाषाई हेल्पलाइन स्थापित करने का फैसला किया है। यह हेल्पलाइन पर्यटकों के लिए अंग्रेजी और हिंदी के अलावा महत्वपूर्ण देशों की भाषाओं में उपलब्ध रहेगी, ताकि पर्यटकों को आसानी से मदद और सूचना मुहैया कराई जा सके। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए बड़े शहरों और देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटन पुलिस का गठन पहले ही किया जा चुका है। पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि भाषा के कारण कई बार स्थानीय ट्रेवल एजेंटों और पर्यटन गाइड पर्यटकों को ठगने पर उतारू हो जाते हैं। भाषा समस्या के कारण ही स्थानीय पुलिस उनकी मदद करने में अपने को असमर्थ महसूस करती है। ऐसे में हेल्पलाइन और पर्यटन पुलिस से पर्यटकों को काफी सहयोग मिलेगा।

केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के चिरंजीवी ने कहा कि महिलाओं के साथ दिल्ली और देश के बाहर लगातार हो रहे अपराध के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि खराब हो रही है। इसका असर विदेशी पर्यटकों पर पड़ सकता है। इसलिए मंत्रालय पर्यटकों की सुरक्षा का पुख्ता प्रबंध कर रहा है। राज्यों से कहा गया है कि वे अपने राज्य के पर्यटन स्थलों की कड़ी सुरक्षा करें। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का ख्याल रखें। चिरंजीवी ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की है, जिसमें सुरक्षा के सभी पहलुओं पर चर्चा की गई। इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही यात्रा संबंधी विभिन्न संगठन के प्रतिनिधियों ने हेल्पलाइन शुरू करने का सुझाव दिया था, जिसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया। यह हेल्पलाइन शीघ्र शुरू कर दी जाएगी।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि हर विदेशी पर्यटक के लिए भारत एक महत्वपूर्ण गंतव्य बन गया है, क्योंकि पर्यटकों को यह विश्वास होता है कि जो कुछ वह अपने जीवन में खोज रहा है, वह उसे भारत में प्राप्त कर सकता है। उसके इस यकीन को बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। चिरंजीवी ने कहा कि यह भी सच है कि देश की राजधानी में हुए गैंगरेप की घटना ने विश्व के पर्यटकों में खौफ पैदा किया है। इस खौफ को दूर करने के लिए पर्यटन मंत्रालय विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है।

पर्यटन मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि देशभर में कई धर्मों के तीर्थ स्थल हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थ स्थल हैं, जबकि राजस्थान में जैन धर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थान हैं। राज्यों और पर्यटन से जुड़े संगठनों की राय ली जा रही है। पर्यटन से जुडे कई संगठनों ने तो यहां तक कहा कि अपने देश की संस्कृति ‘अतिथि देवो भव’, की है। भारत सरकार के पर्यटन विभाग का भी यही मूल मंत्र है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटकों को अतिथि व देवता का दर्जा दिया जाता है, लेकिन यह सब महज कागजों में ही है। हकीकत तो यहां तक है कि हमारे देश में पर्यटकों को दुधारू गाय समझा जाता है। यहां जिस अतिथि का आदर सत्कार होना चाहिए, वहां उन्हें लूटा जा रहा है। वह भी योजनाबद्ध तरीके से।

पर्यटन संगठनों का कहना है कि हैरानी की बात तो यह है कि इस कृत्य में वे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें सरकार ने अतिथियों के स्वागत का जिम्मा सौंपा है। वहीं कुछ अधिकारियों ने दबी जुबान से कहा कि काफी पहले से चल रहे ठगी के इस ‘खेल’ में एक साथ कई संगठन काम कर रहे हैं। पर्यटन विभाग एवं सरकार भी इससे वाकिफ है, लेकिन वह इस चेन को तोड़ने में असमर्थ है, क्योंकि, हर कोई ‘चांदी का जूता’ बतौर घूस चाहता है।

दिल्ली में 150 से ज्यादा बड़ी ट्रेवल एजेंसियां हैं, वह 20 से 25 बड़े शोरूमों से जुड़ी हैं। इनके कमर्चारी विदेशी अतिथियों को उन्हीं दुकानों में ले जाते हैं, जहां से उनका कमीशन बंधा होता है। दिल्ली के बाहर खजुराहो, वाराणसी, आगरा, जयपुर, चंडीगढ़, अमृतसर, जोधपुर, श्रीनगर आदि पर्यटन स्थलों पर भी यही हाल है।

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