नकल रोकने का ये अन्जाम

भाजपा को प्रचंड बहुमत और गोरखधाम पीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के हाथ में उत्तर प्रदेश की बागडोर थमाए जाने के बाद ऐसा लगता था कि अब राज्य में गुंडा-माफियाराज का खात्मा होगा और कानून का राज कायम होगा। लेकिन थोड़े से अंतराल में ही समझ में आ गया कि कानून का भरोसा कायम करना इस निजाम के भी बूते की बात नहीं है, क्योंकि माफिया ने कानून को बुरी तरह अपने पंजे में जकड़ रखा है। फिर वह भूमाफिया हो या शिक्षा माफिया अथवा कोई और माफिया। हाल ही में आगरा के डाॅ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के एक ईमानदार प्रोफेसर पे्रमशंकर तिवारी पर हुए जानलेवा हमले के बाद शिक्षा बनाम् नकल माफिया का ऐसा वीभत्स चेहरा सामने आया है कि दांतों तले उंगली दबानी पड़ जाएगी। हमले से बड़ी हैरत की बात यह है कि मौत के मुंह से वापस लौटे इस प्रोफेसर के हमलावरों की सच्चाई सामने आने के बाद भी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। प्रोफेसर की वृद्ध मां और परिवार के सदस्यों को धरने तक पर बैठकर सरकार की तथाकथित कानून-व्यवस्था की हकीकत बयान करनी पड़ी, लेकिन कानून के रखवालों के कान पर फिर भी जूं नहीं रेंगी। इस लेख में ईमानदारी की मिसाल प्रोफेसर और शिक्षा बनाम् नकल माफिया की हकीकत को इस उम्मीद के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है कि कानून का राज कायम करने वाली सरकार की आंखें खुलेंगी और वह माफिया के मकड़जाल को तोड़ने के लिये संजीदा होगी।