स्टार बेटियों का अलग ही जलवा

फिल्मों में परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप झेलने वाले करन जौहर की ताजा फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ के दूसरे संस्करण से एक और स्टार बेटी ने फिल्मों में पदार्पण कर लिया है। यह है चंकी पांडे की बेटी अनन्या पांडे। इससे पहले सैफ अली खान-अमृता सिह की बेटी सारा अली खान ने दो हिट फिल्मों- ‘केदारनाथ’ व ‘सिबा’ से धमाकेदार शुरुआत की ही थी। कोलंबिया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट सारा पिछले कुछ समय से सोशल नेटवîकग साइट्स पर अपनी टिप्पणियों और गतिविधियों की वजह से खासी सुर्खियां बटोरती रही हैं। बॉयफ्रें ड वीर से उनके गुपचुप शादी कर लेने की खबर भी उड़ी। अब इन चर्चाओं को विराम देकर सारा अब स्टार बनने की प्रक्रिया में हैं।

प्रतिष्ठित फिल्मी परिवारों की बेटियों में अभिनय की बढ़ती चाह सारा या अनन्या तक ही सीमित नहीं है। श्रीदेवी और बोनी कपूर की बेटी जाह्न्वी ‘धड़क’ से दस्तक दे चुकी हैं। संजय दत्त की बेटी त्रिशाला भी ऐसी ही मंशा जाहिर कर चुकी है। जैकी श्राफ की बेटी और टाइगर श्राफ की बहन कृष्णा अपने हॉट व बोल्ड फोटो सोशल मीडिया पर डालने की वजह से पिछले कुछ समय से चर्चा में है। अगला पड़ाव फिल्मों में अभिनय ही है। लाइन में शाहरुख खान की बेटी सुहाना भी हैं।
हाल के सालों में फिल्म इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि फिल्मी परिवारों के बेटों की तुलना में बेटियां ज्यादा ख्याति व सफलता पा रही हैं। फिलहाल सबसे आगे अनिल कपूर क बेटी सोनम कपूर है। उनकी अभिनय प्रतिभा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसके बावजूद अपने छोटे से करिअर में उन्होंने कई पड़ाव तय कर लिए हैं। ‘सांवरिया’ से अभिनय की शुरुआत करने से पहले सोनम निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली की सहायक रहीं। फिल्म नहीं चली लेकिन सोनम कपूर चल गईं। पैर ठीक से जमे भी नहीं थे कि निर्माता बन गईं और ‘आयशा’ व ‘खूबसूरत’ बना डाली। फिल्मी सक्रियता के बीच सोनम फैशन स्टाइलिस्ट के रूप में भी काफी ख्याति पा चुकी हैं। अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में उनकी ड्रेसिग सेंस और मेकअप की खूब चर्चा होती है। इसी वजह से कई प्रमुख प्रसाधन कंपनियों ने उन्हें ब्रांड एंबेसडर बना लिया है। कोई नई पहल हालांकि सोनम ने नहीं की। उनसे पहले और उनके बाद भी कई फिल्मी बेटियां अभिनय के मैदान में दस्तक दे चुकी हैं। पहले के जमाने में भी तमाम तरह की सामाजिक और पारिवारिक बंदिशों के बावजूद फिल्मों से जुड़ी हस्तियों की बेटियां फिल्मों में आईं। यह वह दौर था जब फिल्मों में भले घर की लड़कियों का काम करना वर्जित माना जाता था। उस माहौल में संभ्रांत परिवारों की बेटियों ने भी लांछन और उपहास का मुकाबला करते हुए अभिनय या फिल्म निर्माण से जुड़ी किसी अन्य विधा को कॅरिअर बनाने में रुचि दिखाई।
भारत की पहली बोलती फिल्म ‘आलमआरा’ की नायिका जुबेदा फातिमा बेगम की बेटी थी। मूक फिल्मों के जमाने में फातिमा बेगम अभिनय और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में जाना माना नाम थीं। आगा हडा कश्मीरी के लिखे कई नाटकों में अभिनय करने वाली शरीफा ने पहले बनी ‘मदर इंडिया’ में दोहरी भूमिका कर खासी वाहवाही पाई। फिल्मों में उनके सक्रिय रहते ही उनकी बेटी हुस्न बानू फिल्मों में आ गईं और ‘जवानी’, ‘नई रोशनी’, ‘बहन’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। के. आसिफ ने हुस्न बानू को ‘लैला मजनू’ में लैला की भूमिका के लिए चुना लेकिन मजनू बनने वाले गुरुदत्त की असामयिक मौत ने प्रोजेक्ट खटाई में डाल दिया। 1935 में संगीत फिल्म कंपनी की स्थापना कर ‘तलाश ए हक’ जैसी यादगार फिल्में बनाने वाली जद्दन बाई की बेटी नरगिस ने अभिनय के नए प्रतिमान कायम किए। इसे मानसिकता का फर्क ही कहा जाएगा कि आजादी के बाद अभिनेताओं या फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों ने अपने बेटों को तो मैदान में उतार दिया लेकिन बेटियां फिल्मों में काम करें, यह उन्हें गवारा नहीं हुआ। यह पहल अभिनेत्रियों ने की। शोभना समर्थ ने अपनी दोनों बेटियों नूतन व तनुजा को फिल्मों में लांच करने के लिए खुद फिल्म बनाई। ‘हमारी बेटी’ से नूतन को वे सामने लाईं और ‘छबीली’ के जरिये तनुजा से परिचय कराया। अभिनेताओं या निर्माताओं के लिए अपने सपूतों की खातिर फिल्म बनाने का शगल तो काफी पुराना है। शोभना समर्थ अकेली अभिनेत्री थीं जिन्होंने यह साहस दिखाया। अपने अप्रितम सौंदर्य की वजह से विख्यात हुईं नसीम बाबू ने अपनी बेटी सायरा बानू को हर तरह का प्रशिक्षण देने के बाद फिल्मों में उतारा। ‘जंगली’ से शुरू हुआ सायरा का फिल्मी सफर अपनी मां से कहीं ज्यादा सफल भी रहा।
लेकिन अरसे तक ज्यादातर फिल्मी बेटियां अपने पिता की ख्याति की आश्रित रहीं। आजादी से पहले विधवा विवाह पर ‘सिदूर’ जैसी क्रांतिकारी फिल्म बनाने वाले किशोर साहू ने अपनी बेटी नैना साहू के लिए ‘हरे कांच की चूड़ियां’ व ‘पुष्पाजंलि’ बनाई। वी शांताराम ने अपनी बेटी राजश्री को ‘गीत गाया पत्थरों ने’ से लांच किया। इंद्रसेन जौहर ने अपनी बेटी अंबिका को ‘जय बांग्लादेश’ व ‘फाइव रायफल्स’ में मौका दिया। महेश भट्ट ने तो अपनी बेटी पूजा भट्ट को फिल्मों में स्थापित करने के लिए कई फिल्में बनाईं। अभिनय से नाता तोड़ कर ‘पाप’ व ‘जिस्म’ जैसी फिल्मों से पूजा निर्माता भी बन गईं। चरित्र अभिनेता और सैकड़ों फिल्मों में पुलिस अफसर की भूमिका निभाने वाले जगदीश राज की बेटी अनिता राज फिल्मों में एक दशक तक सक्रिय रहीं। शादी के बाद फिल्मों से टूटा उनका नाता टीवी सीरियलों से जुड़ गया। लेकिन ये तमाम बेटियां अपनी कोई विशिष्ट और आत्मनिर्भर पहचान नहीं बना पाईं।
रणधीर कपूर और बबिता की बेटियों- करिश्मा व करीना ने इस चलन को तोड़ा। पिता का सहारा लिए बिना अपने दम पर कॅरिअर शुरू करने का उन्होंने आत्मविश्वास दिखाया। उन्हें सफलता भी मिली और उनसे प्रेरणा लेकर कई फिल्मी बेटियां मैदान में उतर आईं।
फिल्मी बेटियों पर लगी दकियानूसी बंदिश को तोड़ कर उन्होंने साबित कर दिया कि वे किसी भी मामले में फिल्मी बेटों से कम नहीं हैं। अभिनेता व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी सोनाक्षी सिन्हा स्टार बन चुकी हैं। उनके लिए पिता ने फिल्म नहीं बनाई। ऐशा देओल पिता धर्मेंद्र व मां हेमा मालिनी के सहारे के बिना फिल्मों में आईं। फिल्मकार महेश भट्ट और अभिनेत्री सोनी राजदान की बेटी आलिया भट्ट जब ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ में आईं तो आमतौर पर यह राय बनी कि वे नहीं चलने वालीं। उनके सामान्य ज्ञान का भी खूब मजाक उड़ा। आलिया को तो फिल्मों के जानकार तक वन फिल्म वंडर मान रहे थे। दलील थी कि जिससे करन जौहर अभिनय नहीं करा पाए उससे और कोई कैसे माथा फोड़ पाएगा? लेकिन आलिया ने पहले ‘हाईवे’ व ‘टू स्टेट्स’, ‘उड़ता पंजाब’ और उसके बाद ‘डियर जिदगी’ व ‘राजी’ में अपने अभिनय से सभी को चौंका दिया। खास बात यह है कि बड़ी बहन पूजा भट्ट की तरह आलिया ने अपने पिता की फिल्मों का सहारा नहीं लिया। शायद आलिया इस लांछन से बचना चाहती थी कि वे पारिवारिक सहारे के बिना अपनी राह तलाश नहीं सकतीं। खलनायक शक्ति कपूर के बेटे सिद्धार्थ कपूर ने संजय गुप्ता की फिल्म ‘शूट आउट एट वडाला’ से कॅरिअर शुरू किया। नहीं चल पाए। बाजी मारी है बेटी श्रद्धा कपूर ने और वह भी तब जब कुछ साल पहले ‘तीन पत्ती’ फिल्म के साथ श्रद्धा को भी भुला दिया गया था। ‘आशिकी-2’ की सफलता ने उन्हें आलिया की टक्कर में खड़ा कर दिया। और फिर ‘हैदर’ ने श्रद्धा की प्रतिभा की पुष्टि कर दी है। ‘आशिकी-2’ से पहले श्रद्धा दो फिल्मों में आ चुकी थीं। लेकिन उनकी कोई पहचान नहीं बन पाई थी। आदित्य चोपड़ा की ‘औरंगजेब’ को ठुकरा कर ‘आशिकी-2’ चुनने का जोखिम उन्हें रास आ गया। अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बेटे सैफ अली खान भले ही स्टार बन गए हों पर बेटी सोहा अली खान प्रयोगवादी फिल्मों में अपने दम पर अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं। अब सारा अली खान और कृष्णा श्राफ अपने बोल्ड अंदाज के साथ फिल्मों में धमाका करने को तैयार हैं। “