सरकार से नाराज हैं नक्सली

भूपेश सरकार से नाराज नक्सलियों ने सरकार के साथ उद्योग मंत्री कवासी लखमा को देख लेने की चेतावनी देकर खलबली मचा दी हैं। सरकार से माओविदियों की नाराजगी की वजह यह है कि कोतागुडा गांव और गोमियापाल में तीन,तीन ग्रामीणों को पुलिस ने नक्सली बताकर हत्या कर दी। भूपेश सरकार नक्सवाद पर वही काम कर रही है जो रमन सरकार ने किया। सवाल यह है कि नक्सलियों की नाराजगी कहीं झीरम पार्ट टू को अंजाम तो नहीं देगी?

नक्सली क्या अब कांग्रेस नेताओं को अपना निशाना बनाएंगे? झीरम पार्ट टू को अंजाम देंगे? दंतेवाड़ा के भाजपा विधायक भीमा मंडावी की हत्या के बाद ऐसी क्या वजह है कि नक्सलियों ने उद्योग मंत्री कवासी लखमा को देख लेने की धमकी दी। आम आदमी की सांसंे वैसे ही दहशतजदा हैं। बस्तर में कहा जाता है, ‘यहां के आदिवासी को नक्सलियों का मुखबिर बताकर पुलिस गोली मार देती है अथवा नक्सली पुलिस का मुखबिर कहकर गोली मार देते हैं। यानी हर हाल में गोली मौत का वारंट है बेकसूर आदिवासियों के लिए।
गोली नक्सलियों की हो या फिर पुलिस की मारा तो आदिवासी ही जाता है। माओवादी अब आदिवासियों का शुभचितक बनने के लिए पुलिस पर आरोपों की गोलियों चलाने लगे हैं। जब-जब कोई आदिवासी पुलिस की गोली से मरता है तो नक्सली प्रेस नोट जारी कर सरकार को कटघरे में खड़े करते हैं। जाहिर सी बात है कि इन दिनों भूपेश सरकार से नक्सली नाराज चल रहे हैं। नक्सलियों की दक्षिण बस्तर डिविजनल कमेटी के सचिव विकास ने प्रेस नोट जारी कर कहा, ‘सुकमा जिले के चितलनार पंचायत स्थित कोतागुड़ा गांव में 14 सितंबर को ग्रामीण अपने गांव के पुजारीगायता को चुनने के लिए अपनी परंपरा के अनुसार शिकार करने जंगल में गए थे। जंगली सुअर शिकार के दौरान घायल हो गया था, उसका पीछा कर रहे थे। इसी बीच चितलनार थाना अंतर्गत के बुर्कापाल कैंप से गश्त पर निकले डीआरजी के जवानों ने ग्रामीणों पर अंधाधुंध गोलीबारी कर सोड़ी देवाल, मुचाकी हड़मा, मुचाकी हिड़मा की निर्मम हत्या कर दी। इनमें से सोड़ी देवाल की घटना स्थल पर ही मौत हुई जबकि दो अन्य ग्रामीणों को घायल अवस्था में पकड़कर उन्हें अमानवीय यातनाएं देकर पुलिस ने उनकी जघन्य हत्या की। अपने दो पेज के पर्चे में माओविदियों ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार चुनावी वायदा भूल गई है। ऐसा लगता है कि भाजपा शासनकाल में कांग्रेस ने फर्जी मुठभेड़ों के विरोध का केवल दिखावा किया है। कथित रूप से ग्रामीणों की हत्या और प्रताड़ना जारी है।’ माओवादियों ने कवासी लखमा को उद्योगों का समर्थक बताया और धमकी दी है। कवासी लखमा आदिवासी विरोधी हैं। उसकी चिकनी चुपड़ी बातों का भंडाफोड़ करें। जबकि कवासी के राजनीतिक विरोधी दबे सुर में नक्सली हिमायती उन्हें बताते हैं। लेकिन माओवादियों की धमकी इस ओर इशारा कर रही है कि कवासी उनके निशाने पर हैं।
इसी तरह की घटना दंतेवाड़ा के गोमियापाल में भी हुई। यहां भी पुलिस ने तीन निर्दोष आदिवासियों को गोली मार दी। गांव के पांच लड़के शराब पी रहे थे। पुलिस ने मडकामरास का पोदिया और मदाड़ी के भीमा को जबरदस्ती अपने साथ ले गई। हिड़मा पुलिस को चकमा देकर अंधेरे का लाभ उठाकर भाग गया। पुलिस अजय, पोदिया और लच्छू को लेकर आगे निकल गई। भीमा पुलिस की गोली का शिकार होने से बच गया। इस मामले पर सामाजिक कार्यकताã सोनी सोरी और बेला भाटिया ने पुलिस थाने में शिकायत करने पहुंची तो पुलिस ने उलटे इन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया।

सलवा जुडूम का विरोध
गौरतलब है कि सलवा जूडूम का कवासी लखमा ने विरोध किया था। तब से कवासी रमन सरकार और सलवा जुडूम समर्थकों की आंखों की किरकिरी बन गए थे। तत्कालीन कलेक्टर के.आर. पिस्दा ने राज्य सरकार को एक गोपनीय पत्र भेजा था जो कि कलेक्ट्रेट में ही सार्वजनिक हो गया था। पत्र में लिखा गया था कि कवासी लखमा से सुरक्षा ले ली जाए। इन्हें नक्सलियों से कोई खतरा नहीं है। अब राज्य सरकार ने इनकी और इनके बेटे हरीश लखमा की सुरक्षा बढ़ा दी है।

कवासी पर गंभीर अरोप
नक्सलियों का आरोप है कि प्रदेश के उद्योगमंत्री कवासी लखमा को गद्दार और धोखेबाज बताया है। चुनाव के पहले आदिवासी हितैषी होने का ढिढ़ोरा पीटने वाले ढोंगी आदिवासियों का गद्दार, धोखेबाज कवासी लखमा सत्ता में बैठते ही आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन व संसाधनों को कौड़ियों के भाव देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हवाले करने के लिए स्वयं उद्योग मंत्री बन बैठे हैं। उन्होंने लखमा पर फर्जी मुठभेड़ को अंजाम देने वाले पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिलवाने का आरोप लगाया है। कवासी की देखरेख में छत्तीसगढ़ भू अर्जन, पुनर्वास, पुनर्व्यवस्थापन कानून 2०19 पास कराया गया है जो कि राज्य के किसानों, दलितों व आदिवासियों की जमीनों, जंगलों, खदानों को छीनकर पूंजीपतियों के हवाले करने के लिए ही बनाया गया है।

नक्सली मना रहे हैं वर्षगांठ

मुख्यमंत्री के बयानों से एक बात साफ है कि वे नक्सलियों से दो-दो हाथ करने को तैयार हैं। चौंकाने वाली बात है कि माओवादियों के प्रति इतनी सख्ती दिखाने के बावजूद माओवादी बैनर में लिखा है कि 5०वीं वर्षगांठ मनाने एवं नई पार्टी भाकपा माओवादी की 15वीं वर्षगांठ समारोह को 21 सितंबर से 8 नवंबर तक देश भर में क्रांतिकारी जोश के साथ मनाने के साथ दीर्घकालीन जन युद्ध को देशभर में विस्तृत और तेज करना है। नक्सलवादी क्रांति जिदाबाद। माओवादियों ने एलान कर रखा है कि बड़े पैमाने पर पार्टी का सदस्य बनो और दंडकारण्य के क्रांतिकारी आंदोलन को आगे बढ़ाएं। जाहिर सी बात है कि नक्सली संगठन फरवरी तक नई भर्ती करेंगे। उसके बाद वे हमला करेंगे। उनकी दहशतगर्दी अब भी कायम है।
गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि इन नौ महीनों में कांग्रेस सरकार ने नक्सली गतिविधियों पर काफी हद तक काबू पाया है। पूर्ववतीã सरकार में साहस ही नहीं था वर्ना आज तस्वीर कुछ और होती। दंतेवाड़ा की कांग्रेस विधायक देवती कर्मा बोलीं ‘नक्सल पहले भी था आगे भी रहेगा इसको खत्म करना मुश्किल है।’ डी.जी. डीएम अवस्थी कहते हैं,’ नक्सली डरे हुए हैं इसलिए लगातार इनामी नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। प्रदेश में माओवाद लगातार कमजोर होता जा रहा है। ऐसा नहीं लगता कि वे झीरम पार्ट टू कर सकेंगे।’ वहीं माना जा रहा है कि यदि सरकार नक्सलियों के प्रति अपना सख्त रवैया बनाए रखती तो नक्सली किसी गंभीर वारदात को अंजाम दे सकते हैं। वहीं भविष्य की रणनीति के तहत खुलेआम नई भर्ती का पोस्टर, बैनर और पर्चे बांट रहे हैं। जो अच्छा संकेत नहीं है।

नक्सली वारदातें दो माह की
“नक्सलियों पुलिस की मुखबिरी करने का आरोप लगाते हुए मडकम रोहित हत्या कर दी है। घटना सुकमा जिले के डब्बाकोंटा की है।
“नारायणपुर में नक्सलियों ने एक ठेकेदार की सड़क निर्माण में लगी जेबीसी मशीन सहित मिक्चर मशीन को आग के हवाले किया।
“कांकेर में नक्सलियों द्बारा ब्लास्ट करने से एक कंपनी के तीन कर्मचारियों की मौत हो गई है। जिसके बाद इलाके में सक्रिय नक्सलियों पर सवाल उठने लगे हैं।
“दुर्गुकोंदल में नक्सलियों ने भारी मात्रा में बैनर-पोस्टर लगाए हैं। पोस्टर में आरएसएस कार्यकताã दादू सिह की हत्या की बात कबूली और गिरफ्तार किए गए निर्दोष आदिवासियों को छोड़ने की चेतावनी दी है।
“नक्सलियों ने किरंदुल थाना क्षेत्र में पेरपा चैक पर ग्रामीण ताती बुधराम की धारदार हथियार से हत्या कर दी और शव को सड़क पर फेंक दिया। पर्चा जारी करते हुए नक्सलियों ने ग्रामीणों पर पुलिस की मुखबिरी का आरोप लगाया है।

सरेंडर करने वाले इनामी माओवादी
“दक्षिण छत्तीसगढ़ की बड़ी नक्सल घटनाओं में शामिल बताई जा रही तेलंगाना राज्य कमेटी की मेंबर सुजाता उर्फ नागाराम रूपा को बीजापुर पुलिस ने गिरफ्तार किया।
“बीजापुर पुलिस के सामने छह नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों में दिलीप वड्डे चिन्ना प्लाटून कमांडर माड़ डिवीजन पर आठ लाख का इनाम। मड़कम बंडी डिप्टी सेक्शन कमांडर माड़ डिवीजन पर तीन लाख इनाम। सनकी बड्डे उर्फ सुजाता प्लाटून दो अबूझमाड़ एरिया कमेटी पर दो लाख इनाम। महेश वासम सीएनएम सदस्य नेशनल पार्क एरिया कमेटी, विनोद मेटटा सीएनएम सदस्य नेशनल पार्क एरिया कमेटी का नाम शामिल हैं।
“सुकमा पुलिस ने पांच लाख की इनामी महिला नक्सली माड़वी गंगी चितागुफा क्षेत्र निवासी डीकेएमएस अध्यक्ष, केरलापाल एरिया कमेटी है जो कि 2००6 से नक्सली कमांडर सतिषन्ना के द्बारा संगठन से जोड़ी गई थी। मड़कम हुंगी निवासी चितागुफा क्षेत्र कर्कोटा एलओएस सदस्या इनामी एक लाख रुपये, कुड़ामी गंगा निवासी कुकानार क्षेत्र पेदारास एलओएस सदस्य इनामी एक लाख रुपये, सोड़ी जोगा निवासी गादीरास क्षेत्र नक्सली सहयोग।
“दंतेवाड़ा पुलिस को नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कामयाबी हाथ लगी। चार इनामी नक्सली समेत 28 नक्सलियों ने जवानों के सामने सरेंडर किया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों में 26 नंबर प्लाटून सदस्य मंगलू दो लाख का इनाम, बामन कवासी कटेकल्याण एलजीएस सदस्य एक लाख इनामी, हांदा एलजीएस सदस्य एक लाख इनामी पोडियामी गंगी, सीएनएम कमांडर एक लाख इनामी सन्नू मरकाम, भीमा कुड़ामी, हांदो कुडामी, रोसोल माडवी, जोगा कवासी, बुधरा माडवी, आयता मडकामी, आयतू मडकामी, हडमा सोढ़ी, मादे कुहराम, बामन मरकाम, लक्खो कुडामी, लखमा मुचाकी, हुंगा मुचाकी, सुकड़ा मुचाकी, गागरू मरकाम, सुकड़ा मडकामी, हडमाकवासी, लच्छूकोवासी, बामन मरकाम, बुधराम कवासी, हिड़मा मडकामी, सुकड़ा कवासी, महादेव पोडियाम जन मिलिशिया सदस्य शामिल हैं।