महिलाओं के लिए नर्क

आईएसआईएस ने बर्बरता की सभी हदें पार कर दी हैं वह महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शता। आईएसआईएस का इतिहास देखने पर एक बात स्पष्ट हो जाती है कि यह संगठन महिलाओं और बच्चों के शारीरिक शोषण का समर्थन करता है। मानव अधिकार, नर-नारी समानता आदि मुद्दे तो उसके खयाल में भी नहीं आते। असल में इस्लामिक स्टेट पुरुषों द्बारा पुरुषों के लिए बनाया गया राज्य है। उन पुरुषों के लिए जिन पर हथियार, हत्याएं, यातनाएं और बलात्कार की इच्छा, बच्चों और महिलाओं के शोषण जुनून सवार है। गैर सुन्नी महिलाओं के लिए तो यह खिलाफत नरक से भी बदतर है तो सुन्नी महिलाओं के लिए कैद। गैर सुन्नी महिलाओं के साथ बलात्कार, उन्हें सेक्स स्लैव बनाना, उन्हें मौत के घाट उतारना, मारना-काटना वहां आम बात है। सुन्नी महिलाओं को ये सारी यातनाएं तो नहीं झेलनी पड़तीं मगर उन्हें घर की चहारदीवारी में कैद रहना पड़ता है, सिवाय उनके जो महिला पुलिस हैं।

ंलेकिन अन्य जिहादी संगठनों और आईएसआईएस में एक फर्क भी है। बाकी जिहादी संगठनों से महिलाएं पूरी तरह गायब हैं। उनकी प्रचार सामग्री को देखें तो एक बात उभर कर आती है कि जहां तालिबान जैसे संगठनों के प्रचार सामग्री में महिलाएं गायब हैं वहीं आईएसआईएस की प्रचार सामग्री में उन्हें महत्वपूर्ण स्थान हासिल है। उनको अपने संगठन के साथ जोड़ने की कोशिश है। हालांकि दोनों के सोचने के नजरिये में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है। तालिबान ने महिलाओं से कहा था कि बुर्का पहने और रक्त से संबंधित पुरुष रिश्तेदार के बगैर घर से बाहर न निकलें। समाज में महिलाओं को बिल्कुल अलग-थलग कर दिया गया था। न उन्हें पढ़ने दिया जाता, न काम करने की इजाजत थी। इसका उल्लंघन होने पर कोड़े मारे जाते थे। तालिबान ने महिलाओं की फोटोग्राफी पर भी पाबंदी लगा दी थी। कुल मिलाकर महिलाएं समाज का ­श्य हिस्सा नहीं थीं। आईएस भी उन्हें शिक्षा से रोकता है और जो महिलाएं डेàस कोड़ का पालन नहीं करती उन्हें कड़ी सजा देता है। लेकिन तालिबान और उसमें तो महत्पवपूर्ण फर्क है। तालिबान महिला के एक ही रोल पर जोर देता है। आईएस में वे कई भूमिकाओं में हैं।
आईएसआईएस ने महिलाओं का सेक्स आब्जेक्ट के रूप में काफी इस्तेमाल करता है। आईएसआईएस अपने प्रचार-प्रसार में महिलाओं का काफी उपयोग करती है उसकी एक वजह यह है कि इससे पश्चिमी देशों में मीडिया में कवरेज और सुर्खिया मिलती हैं। इसके अलावा भर्ती के लिए भी महिलाओं की ऑनलाइन उपस्थिति जरूरी है। तभी तो आईएसआईएस की रिक्रूट सीरिया में नकाब पहने पर हथियार लेकर खड़ी मुद्गा में अक्सर फोटो पोस्ट करती हैं। सोशल मीडिया पर आईएसआईएस के महिला पुलिस संगठन में अपनी भूमिका के बारे में बताती है। इस तरह के प्रचार की जरूरत होती है ताकि विदेशी महिलाएं आईएसआईएस की तरफ आकर्षित हों। लोगों और खासकर महिलाओं को जिहादी वधू के बारे में पता चले। सेक्सुल जिहाद के बारे में वह जानें।
अपने को खिलाफत कहनेवाला आईएसआईएस एक ऐसा समाज बना रहा है जिसकी जड़ं उसकी विचारधारा में हों और वे केवल अमेरिका और यूरोप ही नहीं, सारे इस्लामी विश्व से परिवार लाना चाहते है। ऐसे परिवार जो इस्लामिक स्टेट के परिवार बने। ऑनलाइन रिक्रूटमेंट के लिए लगातार विभिन्न भाषाओं में संदेश डाले जाते हैं जिसमें मुस्लिमों से कहा जाता है कि पश्चिम के सुरक्षित मगर द्बंद्बपूर्ण जीवन को छोड़कर खिलाफत में आएं। और आईएसआईएस की बदनामी के बावजूद इस अपील पर आने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती रही। मजेदार बात यह है कि लोग आईएसआईएस को मौत का कल्ट मानते हैं मगर वे तो नया देश बनाना चाहते हैं। एक इस्लामी यूटोपिया।
आईएसआईएस के महिलाओं के प्रति रवैये अध्ययन करनेवाली सिमरन पारेख कहती हैं। दूसरे आतंकवादी समूहों की तरह ही आईएसआईएस आतंकवादी संगठन भी महिलाओं का बलात्कार अपने मनोरंजन के लिए और उत्साहवर्धन के लिए करता रहा है ताकि वह युद्धकाल के दौरान बेहतर प्रदर्शन कर सकें। ये आतंकी समूह बलात्कार के बाद इन महिलाओं का परित्याग नहीं करता बल्कि उन्हें अपनी इच्छापूर्ति के लिए दास बना कर रखता है। खासतौर पर यजीदी महिलाओं के साथ ऐसा होता रहा है। यजीदी महिलाओं की तुलना में विदेशी महिलाओं को जिहादी वधू के रूप में अधिक उच्च स्थान प्रा’ है। यजीदी महिलाएं मूर्तिपूजक हैं इसलिए आईएसआईएस इन महिलाओं को दंडस्वरूप सिर्फ सेक्स गुलाम का ही दर्जा देता है। यही वजह है कि बलात्कार के बाद अक्सर इन्हें गर्भपात जैसे पीड़ादायक क्षणों से गुजरने के लिए मजबूर किया जाता है। वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी महिलाएं आईएसआईएस विचारधारा को दो मायनों में बढ़ावा देती हैं। पहला, इनमें से कुछ महिलाएं आईएसआईएस के काल्पनिक जीवन को बढ़ावा देने के लिए सोशल नेटवर्किं ग साइट का प्रबंध करती हैं । इन तस्वीरों में बहादुरी की मिसाल के तौर पर इन्हें पेश किया जाता है। दूसरा, आईएसआईएस युद्ध के दौरान शादी से पहले सेक्स संबंध रखने की इजाजत देता है, साथ ही महिलाओं को सेक्स गुलाम के रूप में रखने की भी अनुमति देता है जो विकृत मानसिकता के पुरुषों को खासा आकर्षित करता है।
पारेख लिखती हैं -जहां तक आईएसआईएस की रणनीति का संबंध है तो आईएसआईएस सोशल मीडिया के जरिये भोली-भाली किशोर लड़कियों को बहला-फुसला कर अपने संगठन से जोड़ने का काम करता है। आईएसआईएस आदर्श इस्लामिक स्टेट के रूप मे खुद को और अधिक बढ़ाने के लिए अपने युवकों को इस काम पर लगाते हैं। ये युवक भोली-भाली लड़कियों को प्रेम जाल में फंसा कर विवाह के लिए राजी करते हैं। एक बार लड़कियां इनकी बातों में आ जाएं तो यह उन्हें रिझाने का कोई मौका नहीं छोड़ते और उनकी काल्पनिक दुनिया को जैसे पर दे दिए जाते हैं। युवतियों का ब्रेनवॉश किया जाता है कि अगर वह उनसे शादी करेंगी तो उन्हें देश-विदेश की यात्राएं, आधुनिक सुविधाओं से लैस घर, और दूसरी आधुनिक वस्तुओं के साथ ही आकर्षक वेतन की नौकरी आदि मिलेगी। इन सबसे भी बढ़कर उसे एक जिहादी की पत्नी होने का सम्मान मिलेगा।
आईएसआईएस अपने साथ महिलाओं को जोड़ना चाहता है भले ही जिहादी वधू के तौर पर ही सही । इसके लिए संगठन ने ‘वुमेन इन दा इस्लामिक स्टेट: मैनिफेस्टो एंड केस स्टडी’ नाम का लंबा दस्तावोज जारी किया। इसे अल-खनसा ब्रिगेड(आईएसआईएस का महिला आतंकी संगठन) द्बारा तैयार किया गया था। यह दस्तावेज पढ़कर एक बात समझ में आती है कि महिलाओं को यही बताना है कि उनकी जगह बाहर की दुनिया में नहीं घर के अंदर चौका-चूल्हा करने और बच्चे संभालने में है। यहां तक कि इसमें बाल विवाह तक का समर्थन किया गया है। उनसे यही कहा गया है कि उन्हें उच्चशिक्षा में ज्यादा दिलचस्पी लेने की जरूरत नहीं है। आईएसआईएस के लड़ाकों के पास हथियार भले ही अत्याधुनिक हों मगर वे दुनिया 14०० साल पुरानी बसाना चाहते हैं।
कुछ समय पहले इस आतंकी संगठन ने महिलाओं का यौन शोषण करने के लिए धर्म की आड़ ली है। नाम दिया गया है जिहाद अल-निकाह। ट्यूनीसिया की महिलाएं सीरिया और इराक में इस संगठन के उकसावे पर चली तो गई थीं, लेकिन जो कुछ लौटी हैं उनमें ज्यादातर गर्भवती थीं। इस संगठन की एक शाखा अलफारूक, जो आईएसआईएस लड़ाकों को सेक्स के लिए महिलाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभा रहा है। उसने इसे धार्मिक रंग देने की कोशिश की। दरअसल, इस्लाम में कुछ लोगों की मान्यता है कि यदि कोई महिला विवाहित होने के बाद भी किसी जेहादी से शारीरिक संबंध बनाती है तो भी वह जायज है। यदि वह निकाह के बिना भी ऐसा करती है तो वह जायज है। यानी जेहाद अलनिकाह वह ऐसी मुहिलाओं को मुजाहिद कहकर आमंत्रित करता है। कई देशों की महिलाएं इस झांसे में आकर सीरिया पहुंची हैं। उनसे चौबीस घंटे के दौरान आईएसआईएस के कई सदस्यों से शारीरिक संबंध बनाने को कहा गया। इसके लिए एक टाइम टेबल बनाया दिया गया कि कौन सी महिला किस आतंकी के साथ कितना समय बिताएगी। इन महिलाओं से 2० से 1००-1०० आतंकियों ने दुष्कर्म किए। जिन्होंने विरोध किया, उनकी हत्या कर दी। दुष्कर्म करने के बाद महिलाओं को या तो बेचा या फिर उन्हें वापस उनके देश भेज दिया गया। अब इनमें से ज्यादातर गर्भवती हैं।
आईएसआईएस सोशल मीडिया के माध्यम से महिलाओं को बहलाता है। इसके अलावा वहां की कुछ महिलाएं भी आईएसआईएस के इस काम में हाथ बंटाती हैं। वे यूनिवर्सिटी जाकर छात्राओं को जेहाद अल-निकाह के बारे में बताती हैं और उन्हें तैयार करती हैं कि सीरिया जाने के लिए बहलाती-फुसलाती हैं और फिर सीरिया जाने का इंतजाम भी करती हैं। आईएसआईएस के आतंकी अबु अनास अल-लिबी ने जिहाद अल-निकाह मानने से इनकार करने वाली फालूजा की लगभग 15० महिलाओं की हत्या कर दी थी।
आईएसआईएस ने अपने कSर विचारों को लागू कराने के लिए अल-खांसा ब्रिगेड नामक महिला आतंकियों का एक अलग दस्ता तैयार किया हुआ है जो महिलाओं को कंट्रोल करता है। इसके साथ ही अल खांसा ब्रिगेड आतंकी संगठन द्बारा लागू किए गए इस्लामिक नियमों का उल्लंघन करने वाली महिलाओं को कड़ी सजा देने और किडनैप की गई लड़कियों को सेक्स स्लेव बनने के लिए मजबूर करता है। बताया जाता है कि इस महिला ब्रिगेड में आईएसआईएस की विचारधारा में विश्वास करने वाली स्थानीय महिलाओं के साथ ही यूरोपीय देशों से आई कई महिलाएं शामिल हैं, अकेले ब्रिटेन मूल की ही इसमें 6० ब्रिटिश महिलाएं कार्यरत हैं। खासतौर पर ग्लासविजियन की 2० वर्षीया अक्सा महमूद, जिन्होंने आईएसआईएस से जुड़ने के लिए अपने परिवार को छोड़ दिया। ब्रिगेड की मुख्य जिम्मेदारी महिलाओं से संबंधित कानूनों पर सख्त नियंत्रण बनाए रखने की है। इसे महिलाओं की नई नियुक्तियां करने के लिए और घोषणापत्र में महिलाओं के लिए घोषित कानूनों का महिलाएं ठीक से अनुसरण करें इस बात की निगरानी के लिए किया गया है। इस काम के लिए इन्हें मासिक वेतन 1०० पाउंड दिया जाता है। अगर ब्रिगेड की महिलाओं द्बारा कानून की अवज्ञा की जाती है तो यह स्वत: ही अपने लिए दंड को आमंत्रित करती हैं। कानून को तोड़ने वाली महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर रेत में जिंदा दफन कर दंड देना का एक आम तरीका है। अल खांसा आईएसआईएस के लड़ाकों से भी ज्यादा बेरहमी से पेश आती है। आईएसआईएस ड्रेस कोड को न मानने वाली महिलाओं को जिंदा दफ्न कर दिया जाता है। आईएसआईएस के ड्रेस कोड के मुताबिक काला बुर्का शादीशुदा महिलाओं के लिए, सफेद अविवाहित लड़कियों के लिए, नीले रंग का बुर्का तलाकशुदा महिलाओं के लिए और हरा बुर्का विधवा औरतें ही पहन सकती हैं।
खुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले आतंकी संगठन आईएसआईएस के धर्मशास्त्रियों ने विस्तृत दिशा निर्देश जारी किया है, जिसमें इस बात के निर्देश दिए गए हैं कि चरपंथियों द्बारा गुलाम बनाई महिलाओं के साथ उनके ‘मालिक’ कब सेक्स कर सकते हैं। इस निर्देश का मकसद बंधक बनाई गई महिलाओं के साथ ‘बुरे व्यवहार’ पर रोक लगाना बताया जा रहा है। एसआईएस के एक प्रमुख विद्बान कहते हैं, यह निर्देश या फतवा कानूनन बाध्य होगा और आईएसआईएस के पुराने फरमानों से अलग है। इससे यह पता चलता है कि यह समूह अपने कब्जे वाले इराक और सीरिया के हिस्सों में महिलाओं को यौन दासी बनाए जाने को सही ठहराने के लिए सदियों पुरानी व्यवस्था की फिर से व्याख्या कर रहा है।
महिला बंधकों के यौन उत्पीड़न को लेकर पहले भी कई खबरें आती रही हैं। हालांकि प्रिंस्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हाईकेल बर्नार्ड कहते हैं बलात्कार गुलामी यानी गुलामी की संस्था के साथ जुड़ा हुआ है। वो मुस्लिम महिलाओं गुलाम नहीं बनाते, वे गैर मुस्लिम महिलाओं को गुलाम बनाते हैं। उन्होंने विशेषकर यजीदी महिलाओं को गुलाम बनाया या ईसाइयों को जो भागे नहीं और अधीनस्थ नागरिक बनने को तैयार नहीं हुए इसलिए उन्हें दुश्मन समझा जाता है। दुश्मन लड़ाके समझे जाते हैं इसलिए उन्हें गुलाम बनाया जा सकता है। इसलिए महिलाओं और बच्चो को गुलाम बना सकते हैं, बेच सकते हैं, वे कहते हैं हमारे पास इसके उदाहरण हैं। इस रिवाज को आईएसआईएस हाईलाइट करना चाहता है यह दिखाने के लिए प्रारंभिक इस्लामी रिवाज के साथ उसका रिश्ता बना हुआ है क्योंकि प्रारंभिक मुस्लिमों का यही तरीका था।
जहां तक सुन्नी मुस्लिम महिलाओं का सवाल है उनके साथ बलात्कार नहीं हुआ, उनको बेचा नहीं गया, उनका कोई व्यापार नहीं हुआ। कुछ महिलाएं पश्चिम और मध्य पूर्व से आती हैं जिहादियों से शादी करने के लिए। लेकिन जिस जिहादी से वे शादी करती हैं वह मारा जाता है। वे फिर से शादी करती हंै मगर वह शादी जबरन नहीं होती। फिर महिलाओं भी खासकर मुस्लिम महिलाओं को इस्लामिक स्टेट की ओर लुभाने के लिए पूरी प्रोपेगेंडा मशीनरी है। कुल मिलाकर आईएसआईएस में महिलाओ की जिंदगी किसी के लिए नरक है तो किसी के लिए कैद है। “