आदिवासी गुस्से में

दरअसल जब तक डॉ रमन सिंह की सरकार थी कांग्रेस चीखती रही कि विकास के नाम पर हरे पेड़ों की बलि ली जा रही है। अब कांग्रेस की सरकार बैलाडीला की 13 नम्बर की खदान का ठेका अडानी को देकर विरोध को जाल में फंस गई है। यह अलग बात है कि सरकार 7 जून से सरकार के फैसले का विरोध कर रहे आदिवासियों के एक प्रतिनिधि मंडल की चार मांगों को स्वीकार कर आंदोलन की तपिश का कम करने की सियासी चाल चली गई है। प्रभावित क्षेत्र में वनों की कटाई पर तुरंत रोक लगेगी। वर्ष 2014 के फर्जी ग्राम सभा के आरोप की जांच कराई जाएगी। क्षेत्र में संचालित कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जावेगी। राज्य सरकार की ओर से भारत सरकार को पत्र लिख कर जन भावनाओं की जानकारी दी जाएगी।

आदिवासी गुस्से में

दंतेवाड़ा से करीब 30 किलोमीटर दूर किरंदुल में 5000 से ज्यादा आदिवासी नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन(एनएमडीसी) के दफ्तर के बाहर डेरा डाले हुये हैं और बैलाडिला की पहाड़ियों पर हो रहे लौह,खनन का विरोध कर रहे हैं। इस खनन से यहां नंदीराज पहाड़ी के अस्तित्व पर संकट छा गया है जिसे गोंड, धुरवा, मुरिया और भतरा समेत दर्जनों आदिवासी समूह अपना देवता मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं। यहां दो पहाड़ हैं। नन्दराज पहाड़ के सामने का पहाड़ पिटोरमेटा देवी का पहाड़ है। दोनों पहाड़ में भरमार लोह अयस्क है। जिसके लिए ही यह सौदा हुआ है। खदान की ऊंची पहाड़ियां सदाबहार हरे भरे पेड़ो से और वनोऔषधियों से भरी हुई थी। ये आदिवासी आसपास के 50 किलोमीटर के दायरे में फैले गांवों से पैदल चलकर किंरदुल पहुंचे है।दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के गांवों से आये लोग तेज गर्मी और बारिश के बावजूद विरोध स्थल पर डटे हुये हैं। उनका कहना है कि अपने आराध्य देवता की प्रतीक इस पहाड़ी को खनन के लिये देने को वो तैयार नहीं हैं। यह पहली बार नहीं है कि खनिजों से समृद्ध पहाड़ को खोदने की तैयारी को आदिवासियों की आस्था का सामना करना पड़ा हो। उड़ीसा में बाक्साइट से भरी नियामगिरी की पहाड़ियों को भी स्थानीय डोंगरिया कोंध आदिवासियों ने अपने आंदोलन से बचाया। नियाम राजा कोंध आदिवासियों का देवता है और सुप्रीम कोर्ट ने इनके पक्ष में फैसला दिया।

भूपेश के समक्ष समस्या

भूपेश सरकार के समक्ष विकट समस्या है। यदि केन्द्र सरकार से पैसा चाहिए तो वो इतनी हिम्मत नहीं दिखा सकती कि अडानी का ठेका रद्द कर दे। वैसे बस्तर जाने के रास्ते में लाइन से पेड़ ऐसे बिछे और कटे हैं जैसे युद्ध में लाशें बिछ जाती हैं। रमन सरकार के समय भी एक लाख पेड़ काटे जा चुके हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बैलाडीला खदान अडानी को दिए जाने के मामले में कहा कि रमन बताएं कि वे अडानी को माइंस देने के पक्ष में हैं या नहीं। उन्होंने सफाई देते हुए कहा, पिछली सरकार के जो फैसले होते हैं उसे वर्तमान सरकार के अधिकारी तब तक कैरी ऑन करते हैं जब तक कोई नया फैसला नहीं हो जाए।