अल कायदा से आईएसआईएस

आखिरकार अमेरिका ने हैवानियत का पर्याय बन चुके आतंकी संगठन आईएसआईएस के सरगना अबु बकर अल-बगदादी को मारने में सफलता हासिल कर ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कांफ्रेंस में रविवार को इसकी पुष्टि की। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि अमेरिका ने दुनिया के नंबर एक आतंकी को मार गिराया। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के लिए अमेरिका के स्पेशल कमांडोज का यह हमला अप्रत्याशित था। अमेरिकी सेना के विशेष कमांडोज ने सीरिया के इदलिब प्रांत के सुदूर गांव बारिशा में शनिवार की रात को बगदादी को उसके अंजाम तक पहुंचाने के लिए ऑपरेशन शुरू किया। अमेरिकी सैनिक जब आतंकी सरगना अबू बकर-अल बगदादी की तलाश में अचानक इस सुनसान इलाके में पहुंचे तो लोगों को लगा कि यह आम ऑपरेशन है लेकिन जब अमेरिकी हेलिकॉप्टर एक खास मकान के ऊपर मंडराने लगे तो आभास होने लगा कि यह कोई विश्ोष ऑपरेशन है। मेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी हेलीकॉप्टर स्पेशल कमांडोज को लेकर शनिवार को शाम पांच बजे के बाद वाशिगटन डीसी के एक अज्ञात स्थान से रवाना हुए थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हेलीकॉप्टर एक घंटे दस मिनट तक दोनों दिशाओं में आसमान में रहे जबकि ऑपरेशन दो घंटे तक चला। हेलीकॉप्टरों ने तुर्की के ऊपर से उड़ान भरी। यही नहीं, सीरियाई और रूसी सेनाओं के प्रभाव वाले इलाकों के ऊपर से भी उड़े। राष्ट्रपति ट्रंप की मानें तो यह अमेरिकी हेलीकॉप्टरों की बेहद मुश्किल उड़ान थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संवाददाताओं को बताया कि हमारे हेलीकॉप्टर काफी नीचे बहुत तेज गति से उड़ान भर रहे थे। हेलीकॉप्टर जब बगदादी के ठिकाने पर पहुंचे तो स्थानीय आतंकियों ने उन पर भारी फायरिग की जिसे विफल कर दिया गया। बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मिशन में अमेरिका की स्पेशल फोर्स के एक बड़े समूह को शामिल किया था। इसमें आठ हेलीकॉप्टरों के अलावा कई पोत और फाइटर प्लेन भी शामिल थे। ट्रंप ने बताया कि रूस को इस ऑपरेशन के बारे में नहीं बताया गया था फिर भी उसने अमेरिकी हेलीकॉप्टरों को जाने दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पूरा ऑपरेशन ठीक वैसा ही था जैसा कि पाकिस्तान के ऐबटाबाद में अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के खिलाफ चलाया गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के मुताबिक, सबसे पहले अमेरिकी हेलीकॉप्टरों ने बगदादी के ठिकाने को घेर लिया और उसके बाद अमेरिकी सेना के 7० कुशल डेल्टा कमांडोज उतरे। रिपोर्ट के मुताबिक, बिल्कुल किसी फिल्मी सीन की तरह कुशल अमेरिकी डेल्टा कमांडोज ने उतरने के बाद बगदादी के उस गुफानुमा बंकर को घेरना शुरू किया। अत्याधुनिक हथियारों और साजो सामान से लैस कमांडोज के पास प्रशिक्षित कुत्ते और एक रोबोट था। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस पूरे ऑपरेशन को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, व्हाइट हाउस में बैठकर लाइव देख रहे थे। यह पूरा ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था। अमेरिकी कमांडोज जब गुफा के दरवाजे पर पहुंचे तो उन्होंने उसे खोलने के बजाय गुफा की दीवार को ही उड़ा दिया। अमेरिकी कमांडोज को निर्देश थे कि बगदादी पकड़ा जाए तो ठीक, अन्यथा उसे ढेर कर दिया जाए। गुफा में अमेरिकी कमांडोज ने अरबी में बगदादी को सरेंडर करने की हिदायत दी, लेकिन वह मौत के डर से जान बचाकर भागने लगा। इस बीच अमेरिकी सैनिकों ने 11 बच्चों को भी बचाया। गुफा में कुछ आईएस आतंकियों ने सिर पर मौत मंडराती देख समर्पण कर दिया। कमांडोज ने अपने प्रशिक्षित कुत्तों के साथ बगदादी का पीछा किया। बगदादी के साथ तीन बच्चे थे, इसलिए कमांडोज ने ट्रेंड कुत्तों को उसके पीछे छोड़ा। बचने की संभावना खत्म होता देख आतंकी बगदादी ने धमाका करके तीन बच्चों के साथ खुद को उड़ा लिया। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ‘बगदादी कुत्ते की मौत मारा गया। वैसे अब तक कई बार मारा जा चुका है बगदादी। कई बार खबरें आई पर गलत साबित हुईं। इराक और सीरिया दोनों देशों में चल रहे आंतरिक संघर्षों का लाभ उठाकर आईएसआईएस दोनों ही देशों की जमीन पर कब्जा कर स्वतंत्र देश के रूप में उभरा। सीरिया के गृहयुद्ध से उपजे संकट से लाभ उठाते हुए आईएसआईएस 2०13 सीरिया युद्ध में कूद पड़ा और अन्य तकफीरी इस्लामी संगठनों के साथ सीरिया की असद सरकार को उखाड फेंकने के युद्ध में जुट गया। इस कारण आईएसआईएल को सीरिया से लेकर इराक की सीमा तक अपनी गतिविधियां जारी रखने का अवसर मिल गया। मगर प्रतिद्बंद्बी इस्लामी संगठनों के साथ उसके रिश्ते अच्छे नहीं रहे। इराक से अमेरिकी सेना के लौटने के बाद सब कुछ बदल गया। नूरी अल-मलिकी ने इराकी सरकार में शियाओं को भागीदारी देने से इनकार कर दिया। इससे सुन्नी उपेक्षित अनुभव करने लगे। जबकि शिया और कुर्द क्रमश: बगदाद सहित दक्षिण तथा उत्तर के क्षेत्रों पर नियंत्रण किए हुए थे। उपेक्षा के खिलाफ सुन्नियों ने अंबार प्रांत की राजधानी रामादी के बाहर एक महीने तक धरना-प्रदर्शन भी किया था। मगर सरकार कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी। तब सुन्नियों तथा इस्लामिक स्टेट के बीच सहयोग बढ़ने लगा। गौरतलब है कि सुन्नी सद्दाम हुसैन को फ ांसी दिए जाने से गुस्सा थे। सद्दाम हुसैन के शासनकाल में सुन्नियों को आर्थिक-राजनीतिक तौर पर ताकतवर होने का अवसर मिला था। बहरहाल इस्लामिक स्टेट ने सुन्नियों के साथ गठबंधन कर इराक के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया। इराक के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल पर जीत आईएसआईएस के विजय अभियान का सबसे बड़ा मोड़ थी। उसके लड़ाकुओं ने 6 जून, 2०14 को मोसुल पर हमला किया और चार दिन में ही शहर पूरी तरह उनके कब्जे में आ गया । यह उनके लिए भी अचरज की बात थी। मोसुल से आने वाली हाल की रपटों ने यह भी स्पष्ट था कि बाथ पार्टी के पूर्व सदस्यों ने बड़ी तादाद में आईएसआईएल में विलय करके शहर को कब्जाया था। इराक की फौज के हार की बहुत बड़ी वजह यह थी उसे भ्रष्टाचार का घुन लग गया था क्योंकि असल में एक-तिहाई सैनिक ही युद्ध क्षेत्र में मौजूद थे बाकी अफसर आधा वेतन देकर छुट्टी पर रहते थे । मोसूल के बाद आईएसआईएल का विजय अभियान जारी रहा। मोसुल कब्जाने के बाद, इसने टिकरित, तल अफार को भी कब्जे में कर लिया है और बगदाद से 6० मील दूर तक आ पहुंचा। इस जंग में उसने मोसुल के कई बैंकों से पैसा और सोना लूटा और करीब उसे 429 मिलियन नकद मिला । इस संपदा के चलते दुनिया के कई देशों से ज्यादा अमीर बन गया। इसके अलावा भारी तादाद में सेना के अत्याधुनिक उपकरण मिले। जीत के बाद आईएसआईएल ने अपना असली चेहरा दिखाते हुए हजारों बंधक सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की निर्ममता से हत्याएं कर दीं। इस बर्बरता देखकर इराक के लोग हैरान थे। इराक के शिया सबसे ज्यादा उसकी इस घोषणा से नाराज थे कि वह बगदाद और नजफ तथा कर्बला के शिया मजहबी स्थानों पर कब्जा करेगा। शिया इराक के लिए मोसुल शहर हमेशा से ही सिरदर्द रहा है। आईएसआईएस से पहले इस 2० लाख की आबादी वाले और सुन्नी-बहुल शहर पर अलकायदा का दबदबा था। जब व्यापारियों उद्योगपतियों को अपनी और अपने व्यापार की सुरक्षा के लिए पैसा देना पड़ता था। मोसुल के बाद आईएसआईएस ने टिकरित पर कब्जा कर लिया। मगर बगदाद पर हमला नहीं किया। जबकि बगदाद में लोग इस आशंका से काफी डर हुए थे कि राजधानी पर आईएस का हमला होने ही वाला है। बगदाद में 7० लाख आबादी शिया है, वहां शिया इस बात से भयभीत थे कि शिया विरोधी आईएस के नियंत्रण होने पर क्या हश्र होगा। लेकिन ऐसा हमला कभी नहीं हुआ। इराक और सीरिया में यह बागी आतंकी संगठन दिनोदिन फैलता ही गया। एक समय तो उसके कब्जे में इंग्लैंड से बड़ा भूभाग था जिसकी आबादी 6० लाख के आसपास थी। कुछ ही हफ्ते की लड़ाई के बाद आईएस ने खुद को सीरिया के विपक्ष के एक ताकतवर समूह के रूप में स्थापित कर लिया। अल कायदा के सहयोगी संगठन जबहत अल नुसरा को तेल समृद्ध क्षेत्र देर इज्जोर से खदेड़ दिया। विरोधियों की लाख कोशिशों के बावजूद खिलाफत न केवल अस्तित्व में रही वरन फलती-फूलती रही। कुछ समय बाद मोसुल में उसने मांग रखी कि सभी विरोधी आतंकवादी संगठन या तो खिलाफत के प्रति वफादारी की शपथ लें या अपने हथियार सौंप दें। जुलाई के शुरुआती दिनों में सद्दाम हुसैन के समय के पूर्व अफसरों को बंधक बना लिया। जिन संगठनों ने इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन की फोटो लगाई थी उन्हें उसे हटाने या नतीजा भुगतने की चेतावनी दी गई। सीरिया की उत्तरी सीमा पर कब्जे के प्रयास में आईएसआईएस के लड़ाके, हसका, कामुश्ली और इंदान क्षेत्रों में कुर्द लड़ाके से भिड़ गए जिसके बाद दोनों पक्षों में भीषण युद्ध हुआ और आखिरकार आईएसआईएस के लड़ाकों ने इन क्षेत्रों पर नियंत्रण कर लिया और शरीया कानून लागू कर दिया। शरीया कानून के लागू होने के बाद आईएसआईएस की मनमानी आरंभ हो गई और उन्होंने कुर्द नागरिकों का धर्म के विरुद्ध कार्यवाही करने के आरोप में जनसंहार आरंभ कर दिया। आईएसआईएस ने कुर्दों पर भी विदेश से सहयोग और सीरिया की केंद्रीय सरकार के लिए काम करने का आरोप लगाया। अपने क्षेत्रों को आईएसआईएस के हाथों में जाता देखकर कुर्दों ने जबरदस्त मुकाबला किया जिसके बाद भीषण झड़पें आरंभ हो गईं और कुर्दों ने फिर अपने क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया । आईएसआईएस के लड़ाकों ने हलब से 12० कुर्दों का अपहरण कर लिया जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इसके साथ ही, उन्होंने कुर्द-बहुल क्षेत्रों का घेराव कर लिया और कुर्दियों का भीषण जनसंहार किया। मोसुल, टिकरित, फालुजा और इराक में ताल अफार; सीरिया में रक्का- तेल क्षेत्रों, बांधों, मुख्य सड़कों और सीमा क्रॉसिगों पर कब्जा करने के बाद आईएस ने अपनी विजय और अपनी उपलब्धियों को और सारी दुनिया को बताने और दुनियाभर में फैले अनुयायियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए 29 जून इस्लाम के पवित्र महीने रमजान आईएसआईएस के प्रवक्ता अबु मोहम्मद अल अदनानी ने पांच भाषाओं में जारी विज्ञप्ति में घोषणा की कि अबु अल बक र बगदादी के नेतृत्व में खिलाफत की स्थापना की गई है। इसके अलावा ‘ब्रेकिग ऑफ बाउंड्रीज’ वीडियो जारी किया। एक जुलाई को एक ऑडियो बयान में खिलाफत के निर्माण का स्वागत किया। फिर 5 जुलाई को बगदादी पहली बार खलीफा के तौर पर सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए। आईएस ने ऑडियो और वीडियो के जरिये जिस नाटकीय ढंग से घटनाक्रम को पेश किया था उसने सारी दुनिया के मुस्लिम युवाओं का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान आईएस का नियंत्रण सीरिया के अलेप्पो राज्य से 4०० मील दूर इराक के सल्ह दीन प्रांत तक फैल चुका था। आईएसआईएस की इन हरकतों से दुनिया के देशों में असंतोष घुमड़ने लगा जिसका नतीजा आईएसआईएस के खिलाफ गठबंधन के रूप में सामने आया। अगस्त 2०14 में इस गंठबंधन ने इराक के खिलाफ हवाई हमले किए। बाद में आईएस के खिलाफ ज्यादा व्यापक गठबंधन बना। लेकिन कई महाशक्तियां मिलकर भी अपने पिछले अनुभव के कारण आईएसआईएस के खिलाफ जमीनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार नहीं हो पाईं। मगर उन्होंने आईएसआईएस से मुक्ति पाने के लिए हवाई हमले का अभियान शुरू किया। आखिरकार आईएसआईएस का सफाया करके ही दम लिया। उसके बाद कई बार खबरें आईं कि बगदादी मारा गया मगर वह बचने में कामयाब रहा। “